तीन राज्यों की पुलिस, खुफिया एजेंसी आईबी, एक पुलिस कमिश्नर, एक ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर, एक डीसीपी, दो एसीपी, कई पुलिसवाले और चार लोगों की लाश, जिसमें से एक लाश थी इशरत जहां की। गुजरात हाईकोर्ट द्वारा गठित एसआईटी इस एनकाउंटर को फर्जी करार दे चुकी है। आखिर किया क्या था पुलिस अधिकारियों ने। कैसे मारा गया इशरत और उसके साथ मौजूद तीन लोगों को। पढ़िए पूरी कहानी।
तारीख-15 जून 2004
जगह-कोतरपुर, अहमदाबाद
वक्त-सुबह के 5 बजे
पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक अहमदाबाद के एंट्री प्वाइंट नारोल से नीले रंग की एक इंडिका कार गुजरती है। इस कार का नंबर था MH-02 JA 4786। एक खुफिया इनपुट के आधार पर तत्कालीन एसीपी एन के अमीन इस कार का पीछा करते हैं। खुफिया रिपोर्ट ये थी कि इस कार के भीतर चार आतंकवादी मौजूद हैं, जो अहमदाबाद पहुंचकर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करना चाहते हैं। कार की जानकारी मिलने के बाद एसीपी अमीन अपने साथी एसीपी जी एल सिंघल को इसकी जानकारी देते हैं।
पुलिस की कहानी के मुताबिक आतंकियों की कार का पता चलने के बाद वो कुछ देर तक उसका पीछा करते हैं लेकिन इसके बाद दोनों अधिकारी फैसला करते हैं कि कार को अहमदाबाद शहर तक जाने देना ठीक नहीं रहेगा और रास्ते पर नाकेबंदी करके कार को रोकने की रणनीति बनाई जाती है।
अपनी तैयारी के साथ पुलिस रास्ते पर कड़ा पहरा बिठा देती है और फिर कार को कोतरपुर इलाके में रोकने की कोशिश की जाती है लेकिन कार में बैठे आतंकी गोली चलाते हैं और फिर जवाब में पुलिस भी गोलियां दागती है। आखिरकार चार आतंकी मारे जाते हैं। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की इस कहानी के मुताबिक कार में बैठे आतंकी थे 19 साल की कॉलेज छात्रा इशरत जहां, जावेद शेख उर्फ प्रणेश पिल्लई, अमजद अली और जीशान जौहर।
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की इस कहानी को एसआईटी की रिपोर्ट के बाद गुजरात हाईकोर्ट ने फर्जी करार दिया है। एसआईटी के मुताबिक चारों को मारा गया समय और एफआईआर का समय मेल नहीं खा रहा। मसलन इन चारों को पहले मारा गया और बाद में मुठभेड़ की कहानी बनाई गई यानी चारों पुलिस कस्टडी में मारे गए।
जाहिर है एसआईटी की रिपोर्ट और गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के बाद कई एजेंसियों और अधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवालों के घेरे में सबसे पहले केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी है जिसने आतंकियों का इनपुट गुजरात के आला अधिकारियों को दिया था। सवालों के घेरे में इसके बाद अहमदाबाद के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर के आर कौशिक हैं, जिन्हें सबसे पहले खुफिया इनपुट मिला था कि मोदी को मारने के लिए चार आतंकी अहमदाबाद आ रहे हैं। खुफिया रिपोर्ट की जानकारी इसके बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के तत्कालीन ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर पीपी पांडे को दी गई।
पांडे ने ये जानकारी अपने नीचे के अधिकारी डीसीपी डीजी बंजारा को दी, साथ ही ऑपरेशन प्लान बनाने को कहा। इसके बाद बंजारा ने अपने नीचे के दो अधिकारियों एसीपी जी एल सिंघल और एसीपी एन के अमिन को फोर्स के साथ इस ऑपरेशन को अमलीजामा पहनाने को कहा। दोनों एसीपी ने तीन-तीन पुलिस इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर के साथ लाव लश्कर तैयार किया और फिर मुठभेड़ को अंजाम तक पहुंचाया।
लेकिन इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर मामला सुलझाना अभी इतना आसान नहीं है क्योंकि अभी ये साफ नहीं हो पाया है कि इन चारों को पुलिस कस्टडी में मारने के पीछे का मकसद क्या है? जम्मू कश्मीर पुलिस के उस इनपुट का क्या होगा जिसमें अमजद अली और जीशान जौहर को आतंकी बताया गया है? महाराष्ट्र पुलिस के उस खुलासे पर क्या प्रतिक्रिया होगी जिसमें प्रणेश पिल्लई को आतंकी गतिविधियों में लिप्त बताया गया है? अब सबकी नजर सीबीआई की चार्जशीट पर टिकी है।
